२००१ में कॉलेज ज्वाइन करने पर, जबरदस्त इन्टरनेट से लैश कम्पूटर सेण्टर मिल गया, हमें २ दिन में कम्पूटर इस्तमाल की बेसिक जानकारी सिखा दी गयी, बाकी जरूरत ही जननी है.
ठंडा एयर कंडीशनर, सोने पर सुहागा था. बाथरूम भी एयर कंडीशनड होना ताज्जुब वाली बात थी. पहली बार डाटा सेण्टर देखा और सुपर कंप्यूटर भी.
मुद्दे पर आते हैं, कंप्यूटर ज्ञान के पहले पायदान पर ही पोर्न, गेम्स और चैटिंग का पता चला.
हमारे लिए चैटिंग का डेफिनिशन : जहां दुनिया के किसी कोने की लड़की से आप संपर्क कर सकते हैं, और उसको आपसे प्यार हो सकता है.
हम कुछ लड़के एक लड़की पटाने की स्कीम या नए आप्शन पर खुश हुए और लग गए उस वक़्त के फेमस aol और yahoo ग्रुप पर. उन दोनों जगहों को इस्तमाल करके निराशा ही हाथ लगी, उसी बीच आशा की किरण जगी.
एक मित्र ने इन्टरनेट पर लड़की पटाने (सच्चा प्यार) में सफलता हासिल कर ली. हम कुछ लोग उससे इस सफलता का रहस्य जानना चाहते थे, और एक नए चैट ग्रुप का पता चला. कुछ और मित्रों को प्रेमिकाएं मिल गयी. बचे हुए मित्र नयी योजना और अधिक जतन के साथ भीड़ गए.
कंप्यूटर रूम प्रेम मिलन वाले पार्क में तब्दील हो गया था, फर्क एक था की यहाँ जोड़े में से एक प्रत्यक्ष था और दूसरा अप्रत्यक्ष कंप्यूटर के दूसरी तरफ. फिर एक रात धमाका हुआ.
कुछ मित्रों को पता चला की एक ही लड़की उन सभी से बात कर रही है, सब पे फ़िदा होने का दावा करती है. अभी वो मित्र संभल भी नहीं पाए थे की पता चला की उनकी प्रेमिका लडकी नहीं बल्की एक लड़का है. वो लड़का भी कोई और नहीं बल्की उसी कम्पूटर रूम में बैठा हुआ मित्रा था.
वो जनाब प्रेमिका ना मिलने की हताशा में लड़की की प्रोफाइल बनाकर दूसरे मित्रों के मजे लेने लगे थे.
यह काम आज फेसबुक के ट्रोल खूब इस्तमाल कर रहे है